पितृपक्ष 2025: भारत में हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के बाद जो पखवाड़ा आता है, उसे पितृपक्ष कहा जाता है। यही वो समय है जब हम अपने पूर्वजों, यानि पितरों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 (सर्वपितृ अमावस्या) तक रहेगा।
हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते आए हैं कि इस दौरान खान–पान और आचार–व्यवहार में ज़रा भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि इन 15 दिनों में पितर धरती पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं। अगर इस दौरान कोई गलती हो जाए, तो पितर प्रसन्न होने की बजाय अप्रसन्न हो जाते हैं और परिवार को कष्ट झेलना पड़ सकता है।
चलिए जानते हैं कि इस साल पितृपक्ष के दौरान कौन–सी पाँच चीज़ें खाने से मना किया गया है और किन गलतियों से बचना चाहिए।
श्राद्ध के समय ये पाँच चीज़ें भूलकर भी न खाएँ
1. बैंगन, खीरा, मूली, अरबी और गाजर

(Photo: AI generated)
ये सब्ज़ियाँ भले ही रोज़मर्रा में खाई जाती हों, लेकिन पितृपक्ष के समय इन्हें वर्जित माना गया है। इन सब्ज़ियों को तमसिक (अशुद्ध) श्रेणी में रखा गया है। कहा जाता है कि श्राद्ध में इनका इस्तेमाल करने से पितरों का आशीर्वाद अधूरा रह जाता है।
2. सरसों का साग और इसी तरह की पत्तेदार सब्ज़ियाँ
सरसों का साग स्वादिष्ट होता है, लेकिन श्राद्ध में इसे नहीं खाना चाहिए। शास्त्रों में इसका त्याग पितरों की तृप्ति के लिए आवश्यक बताया गया है।
3. मसूर और उड़द की दाल
इन दोनों दालों को अशुभ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि श्राद्ध के समय इनका सेवन करने से पितर अप्रसन्न हो जाते हैं और घर में कलह–कलेश बढ़ सकता है।
4. चना और सत्तू
चना, भुना चना या सत्तू पितृपक्ष में बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। कहा जाता है कि यह पाचन पर भारी पड़ता है और धार्मिक रूप से पितरों की आत्मा को तृप्त नहीं करता।
5. मांस, मछली और अंडा

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मांसाहार तो हर हाल में पितृपक्ष में वर्जित है। मांस, मछली, अंडा, शराब जैसी चीज़ें खाने से पितर बहुत नाराज़ हो जाते हैं और पूरे अनुष्ठान का फल बिगड़ सकता है।
श्राद्ध में अक्सर लोग कर बैठते हैं ये गलतियाँ
भोजन के अलावा पितृपक्ष के दौरान कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें बिल्कुल नहीं करना चाहिए। ये छोटी–छोटी गलतियाँ अनजाने में पूरे श्राद्ध कर्म को व्यर्थ कर सकती हैं।
- शुभ काम करना:
पितृपक्ष के समय कोई भी मांगलिक काम, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन या नई चीज़ की खरीद, अशुभ मानी जाती है। - बाल, दाढ़ी या नाखून काटना:
इस पखवाड़े में बाल या दाढ़ी कटवाना भी निषेध है। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद कम हो जाता है।

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- जानवरों और पक्षियों को नुकसान पहुँचाना:
श्राद्ध के दौरान किसी भी जीव को कष्ट देना महापाप माना गया है। माना जाता है कि पितर किसी रूप में आकर हमारे पास पहुँचते हैं, इसलिए हर प्राणी के साथ दया और करुणा से व्यवहार करना चाहिए। - प्याज और लहसुन का प्रयोग:
ये दोनों ही तामसिक खाद्य हैं, जो श्राद्ध काल में अशुद्ध माने जाते हैं। इसलिए पूजा–पाठ के साथ बने भोजन में इनका प्रयोग न करें।
लोक–मान्यता और आस्था का मेल
गाँव–देहात में लोग कहते हैं कि पितृपक्ष वो समय है जब हमारे बाप–दादे, नाना–नानी और पुरखे हमें आशीर्वाद देने आते हैं। इसलिए घर के लोग इस दौरान सादा भोजन करते हैं, ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं।
माना जाता है कि अगर श्राद्ध सही रीति से हो जाए तो पितर संतुष्ट होकर परिवार पर कृपा करते हैं और घर–आँगन में सुख–समृद्धि बढ़ती है। वहीं, लापरवाही करने पर पितरों का आशीर्वाद अधूरा रह जाता है और घर में परेशानियाँ आने लगती हैं।
निष्कर्ष
पितृपक्ष 2025 में अगर आप अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण करने जा रहे हैं, तो बस इतना याद रखें—
- उन पाँच वर्जित चीज़ों (बैंगन–खीरा–मूली–अरबी–गाजर, मसूर–उड़द, चना–सत्तू, सरसों का साग और मांसाहार) से दूरी बनाएँ।
- श्राद्ध के समय शुभ काम, नाखून–बाल कटवाना या जानवरों को नुकसान पहुँचाने जैसे काम न करें।
- सादा जीवन, दान–पुण्य और श्रद्धा भाव ही पितरों को प्रसन्न करते हैं।
अगर श्रद्धा सच्ची हो, तो पितर हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उनकी कृपा से परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
डिस्क्लेमर– इस लेख में दी गई सभी जानकारियाँ धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और परंपरागत लोकविश्वास पर आधारित हैं। इनका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता प्रदान करना है। हम किसी भी प्रकार की अंधविश्वास या व्यक्तिगत निर्णय की पुष्टि नहीं करते। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या कर्मकांड करने से पहले अपने परिवार के बुजुर्गों, पुरोहित या ज्ञानी पंडित से सलाह अवश्य लें।








